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कभी कुछ चीजें युही….##

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कभी कुछ चीजें युही….##
कड़ी धूप में बैठी बूढ़ी
बेच रही कुछ केले फिकेसे,
पोछ रही पसीना माथेका
फटे पुराने किसी कपडेसे,
भिक नही चाहिए पर इनके
मेहनतको दिलसे सलाम करो,
और कभी कुछ चीजें युही
इनसे खरीद लिया करो…..
फटे पुराने धोती पहने
बेर बेच रहा बजारके कोनेमें,
धुंदली नजर ना कुछ देख पाता
संजोये सन्मानको अपने सिनेमे,
दो पैसे गये समझके अपने
इंसानियत को जागृत करो,
और कभी कुछ चीजें युही
इनसे खरीद लिया करो…..
बूढ़ी अम्मा एक सहमिसी
बेच रही दिये मिट्टीके,
अगर कुछ ना बेच पायी तो
अंधेरा रहेंगा आज उसके घरमे,
बड़े दुकानोपे सब जाते है
कभी इनपेभी ध्यान दिया करो,
और कभी कुछ चीजें युही
इनसे खरीद लिया करो…..
कलम बेचने वाला देखो
देखो गजरा बेचने वाला,
कमीज़पे टांगे कुछ चीजें सस्तीसी
देखो कभी भिक न मांगने वाला,
चंद रुपये बिना फिजुलके
इनपेभी खर्च किया करो,
और कभी कुछ चीजें युही
इनसे खरीद लिया करो…..
इनसे ख़रीदके चाहे तो किसी
जरूरतमंद को दे दिया करो…
पर कभी कुछ चीजें युही
इनसे खरीद लिया करो…
पर कभी कुछ चीजें युही
इनसे खरीद लिया करो……….
शब्दरचना
-पराग पिंगले
यवतमाल

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